deepak

२०१२ विनायक चतुर्थी व्रत के दिन उज्जैन, मध्यप्रदेश, भारत के लिए

deepak
Switch to English
Empty
Title
२०१२ विनायक चतुर्थी
वर्ष:
ग्लोब
अपना शहर खोजें:
२०१२ विनायक चतुर्थी उपवास के दिन उज्जैन, भारत के लिए

विनायक चतुर्थी २०१२

विनायक चतुर्थी
भगवान विनायक
हिन्दु कैलेण्डर में प्रत्येक चन्द्र मास में दो चतुर्थी होती है। हिन्दु धर्मग्रन्थों के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की तिथि है। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

हालाँकि विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने में होता है लेकिन सबसे मुख्य विनायक चतुर्थी का व्रत भाद्रपद के महीने में होता है। भाद्रपद के दौरान पड़ने वाली विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। सम्पूर्ण विश्व में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
kalash २०१२  kalash
decoration
        गणेश पूजा का समय
२७ जनवरी (शुक्रवार) विनायक चतुर्थी ११:३४ से १३:४५
२५ फरवरी (शनिवार) विनायक चतुर्थी ११:३१ से १३:४९
२६ मार्च (सोमवार) विनायक चतुर्थी ११:२० से १३:४५
२५ अप्रैल (बुधवार) विनायक चतुर्थी ११:०८ से १३:४२
२५ मई (शुक्रवार) विनायक चतुर्थी ११:०४ से १३:१६
२३ जून (शनिवार) विनायक चतुर्थी ११:०९ से १३:५०
२२ जुलाई (रविवार) विनायक चतुर्थी ११:१४ से १३:५३
२१ अगस्त (मंगलवार) गणेश चतुर्थी ११:१४ से १३:४६
१९ सितम्बर (बुधवार) गणेश चतुर्थी ११:०८ से १३:३३
१८ अक्टूबर (बृहस्पतिवार) विनायक चतुर्थी ११:०३ से १३:२०
१७ नवम्बर (शनिवार) विनायक चतुर्थी ११:०७ से १३:१७
१६ दिसम्बर (रविवार) विनायक चतुर्थी ११:१९ से १३:२६
decoration
टिप्पणी - २४ घण्टे की घड़ी उज्जैन के स्थानीय समय के साथ और सभी मुहूर्त के समय के लिए डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है)।
विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान से अपनी किसी भी मनोकामना की पूर्ति के आशीर्वाद को वरद कहते हैं। जो श्रद्धालु विनायक चतुर्थी का उपवास करते हैं भगवान गणेश उसे ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। ज्ञान और धैर्य दो ऐसे नैतिक गुण है जिसका महत्व सदियों से मनुष्य को ज्ञात है। जिस मनुष्य के पास यह गुण हैं वह जीवन में काफी उन्नति करता है और मनवान्छित फल प्राप्त करता है।

हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन गणेश पूजा दोपहर को मध्याह्न काल के दौरान की जाती है। दोपहर के दौरान भगवान गणेश की पूजा का मुहूर्त विनायक चतुर्थी के दिनों के साथ दर्शाया गया है।

स्थान आधारित विनायक चतुर्थी के दिन

यह जानना महत्वपूर्ण है कि विनायक चतुर्थी के उपवास का दिन दो शहरों के लिए अलग-अलग हो सकता है। यह जरुरी नहीं है कि दोनों शहर अलग-अलग देशों में हों क्योंकि यह बात भारत वर्ष के दो शहरों के लिए भी मान्य है। विनायक चतुर्थी के लिए उपवास का दिन सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है और जिस दिन मध्याह्न काल के दौरान चतुर्थी तिथि प्रबल होती है उस दिन विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इसीलिए कभी कभी विनायक चतुर्थी का व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व, तृतीया तिथि के दिन पड़ जाता है।

क्योंकि मध्याह्न काल सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है जो सभी शहरों के लिए अलग-अलग होता है। इसीलिए विनायक चतुर्थी के व्रत की तालिका का निर्माण शहर की भूगोलिक स्थिति को लेकर करना अत्यधिक जरुरी है। द्रिकपञ्चाङ्ग की तालिका हरेक शहर की भूगोलिक स्थिति को लेकर तैयार की जाती है इसीलिए यह ज्यादा शुद्ध है। अधिकतर पञ्चाङ्ग सभी शहरों के लिए एक ही तालिका को सूचीबद्ध करते हैं इसीलिए वो केवल एक ही शहर के लिए मान्य होते हैं।
10.160.0.24
facebook button