deepak

२०२० श्री सत्यनारायण पूजा और कथा के दिन उज्जैन, मध्यप्रदेश, इण्डिया के लिए

deepak
Useful Tips on
Panchang
Switch to English
Empty
Title
२०२० सत्यनारायण पूजा
वर्ष:
ग्लोब
अपना शहर खोजें:
२०२० श्री सत्यनारायण पूजा के दिन उज्जैन, इण्डिया के लिए

२०२० श्री सत्यनारायण पूजा और कथा के दिन

सत्यनारायण पूजा
सत्यनारायण पूजा
श्री सत्यनारायण की पूजा भगवान नारायण का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। श्री नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। भगवान विष्णु को इस रूप में सत्य का अवतार माना जाता है। सत्यनारायण की पूजा को करने का कोई दिन तय नहीं है और श्रद्धालु इसे किसी भी दिन कर सकते हैं लेकिन पूर्णिमा के दिन इसे करना अत्यन्त शुभ माना जाता है।

श्रद्धालुओं को पूजा के दिन उपवास करना चाहिए। पूजा प्रातःकाल व संध्याकाल के समय की जा सकती है। सत्यनारायण की पूजा करने का समय संध्याकाल ज्यादा उपयुक्त है जिससे उपवासी पूजा के बाद प्रसाद से अपना व्रत तोड़ सकते हैं।
kalash २०२०  kalash
decoration
१० जनवरी (शुक्रवार) श्री सत्यनारायण व्रत (पौष पूर्णिमा)
०९ फरवरी (रविवार) श्री सत्यनारायण व्रत (माघ पूर्णिमा)
०९ मार्च (सोमवार) श्री सत्यनारायण व्रत (फाल्गुन पूर्णिमा)
०७ अप्रैल (मंगलवार) श्री सत्यनारायण व्रत (चैत्र पूर्णिमा)
०७ मई (बृहस्पतिवार) श्री सत्यनारायण व्रत (वैशाख पूर्णिमा)
०५ जून (शुक्रवार) श्री सत्यनारायण व्रत (ज्येष्ठ पूर्णिमा)
०४ जुलाई (शनिवार) श्री सत्यनारायण व्रत (आषाढ़ पूर्णिमा)
०३ अगस्त (सोमवार) श्री सत्यनारायण व्रत (श्रावण पूर्णिमा)
०१ सितम्बर (मंगलवार) श्री सत्यनारायण व्रत (भाद्रपद पूर्णिमा)
०१ अक्टूबर (बृहस्पतिवार) श्री सत्यनारायण व्रत (अश्विन पूर्णिमा)
३१ अक्टूबर (शनिवार) श्री सत्यनारायण व्रत (अश्विन पूर्णिमा)
२९ नवम्बर (रविवार) श्री सत्यनारायण व्रत (कार्तिक पूर्णिमा)
२९ दिसम्बर (मंगलवार) श्री सत्यनारायण व्रत (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)
decoration
द्रिक पञ्चाङ्ग संध्याकाल के लिए श्री सत्यनरायण पूजा के दिनों को सूचीबद्ध करता है। इसीलिए दिये गए सत्यनारायण पूजा के दिन चतुर्दशी अर्थात पूर्णिमा के एक दिन पहले भी आ सकते हैं। जो श्रद्धालु पूजा को प्रातःकाल में करना चाहते है उन्हें द्रिकपञ्चाङ्ग से सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि पूजा पूर्णिमा तिथि के अन्दर करी जाती है। पूर्णिमा के दिन, प्रातःकाल के दौरान तिथि समाप्त हो सकती है और इसी वजह से पूर्णिमा तिथि हर बार प्रातःकाल की पूजा के लिए उपयुक्त नहीं है।

भगवान सत्यनारायण जो भगवान विष्णु के अत्यन्त हितैषी रूप है उनकी पूजा को मिलाकर पूजा के धार्मिक कृत्य बने होते हैं। पञ्चामृत (दूध, शहद, घी/मख्खन, दही और चीनी का मिश्रण) का उपयोग शालिग्राम जो कि महा विष्णु का पवित्र पत्थर है, को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। पँजीरी जो कि मीठी और गेहूँ के भुने हुए आटे की होती है, केला और अन्य फलों को प्रसाद के रूप में उपयोग में लिया जाता है। तुलसी की पत्तियाँ भी प्रसाद में मिला दी जाती है जिससे प्रसाद और भी ज्यादा पवित्र हो जाता है।

पूजा की अन्य आवश्यकता पूजा की कहानी होती है जिसे कथा के रूप में भी जाना जाता है और यह कथा पूजा में शामिल श्रद्धालुओं और जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं, उनके द्वारा सुनी जाती है। सत्यनारायण कथा में पूजा की उत्पत्ति, पूजा को करने के लाभ और किसी के द्वारा पूजा करने का भूलने से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं की कहानी शामिल हैं।

पूजा की समाप्ती आरती के साथ होती है जिसमें भगवान की मूर्ति या छवि के आस-पास कर्पूर से ज्वलित छोटी सी ज्वाला को घुमाते हैं। आरती के बाद श्रद्धालु लोग पञ्चामृत और प्रसाद को ग्रहण करते हैं। व्रत करने वाले श्रद्धालु पञ्चामृत से व्रत को तोड़ने के बाद प्रसाद को ले सकते हैं।
10.160.15.209
facebook button