deepak

२०१८ संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन उज्जैन, मध्यप्रदेश, इण्डिया के लिए

deepak
Useful Tips on
Panchang
Switch to English
Empty
Title
२०१८ संकष्टी चतुर्थी
वर्ष:
ग्लोब
अपना शहर खोजें:
२०१८ संकष्टी चतुर्थी उपवास के दिन उज्जैन, इण्डिया के लिए

संकष्टी चतुर्थी २०१८

संकष्टी चतुर्थी
भगवान गणेश
हिन्दु कैलेण्डर में प्रत्येक चन्द्र मास में दो चतुर्थी होती हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।

हालाँकि संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने में होता है लेकिन सबसे मुख्य संकष्टी चतुर्थी पुर्णिमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार माघ के महीने में पड़ती है और अमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार पौष के महीने में पड़ती है।

संकष्टी चतुर्थी अगर मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं और इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। पश्चिमी और दक्षिणी भारत में और विशेष रूप से महाराष्ट्र और तमिल नाडु में संकष्टी चतुर्थी का व्रत अधिक प्रचलित है।
kalash २०१८  kalash
decoration
        चन्द्रोदय का समय
०५ जनवरी (शुक्रवार) संकष्टी चतुर्थी
सकट चौथ
चन्द्रोदय२१:३५
०३ फरवरी (शनिवार) संकष्टी चतुर्थी चन्द्रोदय२१:१६
०५ मार्च (सोमवार) संकष्टी चतुर्थी चन्द्रोदय२१:५०
०३ अप्रैल (मंगलवार) अंगारकी चतुर्थी चन्द्रोदय२१:२६
०३ मई (बृहस्पतिवार) संकष्टी चतुर्थी चन्द्रोदय२१:५५
०२ जून (शनिवार) संकष्टी चतुर्थी चन्द्रोदय२२:१५
०१ जुलाई (रविवार) संकष्टी चतुर्थी चन्द्रोदय२१:३८
३१ जुलाई (मंगलवार) अंगारकी चतुर्थी चन्द्रोदय२१:३२
३० अगस्त (बृहस्पतिवार) संकष्टी चतुर्थी
बहुला चतुर्थी
चन्द्रोदय२१:२२
२८ सितम्बर (शुक्रवार) संकष्टी चतुर्थी चन्द्रोदय२०:४२
२७ अक्टूबर (शनिवार) संकष्टी चतुर्थी
करवा चौथ
चन्द्रोदय२०:१०
२६ नवम्बर (सोमवार) संकष्टी चतुर्थी चन्द्रोदय२०:५१
२५ दिसम्बर (मंगलवार) अंगारकी चतुर्थी चन्द्रोदय२०:४५
decoration
टिप्पणी - २४ घण्टे की घड़ी उज्जैन के स्थानीय समय के साथ और सभी चन्द्रोदय के समय के लिए डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है)।
भगवान गणेश के भक्त संकष्टी चतुर्थी के दिन सूर्योदय से चन्द्रोदय तक उपवास रखते हैं। संकट से मुक्ति मिलने को संकष्टी कहते हैं। भगवान गणेश जो ज्ञान के क्षेत्र में सर्वोच्च हैं, सभी तरह के विघ्न हरने के लिए पूजे जाते हैं। इसीलिए यह माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी तरह के विघ्नों से मुक्ति मिल जाती है।

संकष्टी चतुर्थी का उपवास कठोर होता है जिसमे केवल फलों, जड़ों (जमीन के अन्दर पौधों का भाग) और वनस्पति उत्पादों का ही सेवन किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी, आलू और मूँगफली श्रद्धालुओं का मुख्य आहार होते हैं। श्रद्धालु लोग चन्द्रमा के दर्शन करने के बाद उपवास को तोड़ते हैं।

उत्तरी भारत में माघ माह के दौरान पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही भाद्रपद माह के दौरान पड़ने वाली विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। सम्पूर्ण विश्व में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

तमिल नाडु में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

स्थान आधारित संकष्टी चतुर्थी के दिन

यह जानना महत्वपूर्ण है कि संकष्टी चतुर्थी के उपवास का दिन दो शहरों के लिए अलग-अलग हो सकता है। यह जरुरी नहीं है कि दोनों शहर अलग-अलग देशों में हों क्योंकि यह बात भारत वर्ष के दो शहरों के लिए भी मान्य है। संकष्टी चतुर्थी के लिए उपवास का दिन चन्द्रोदय पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है उस दिन ही संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इसीलिए कभी कभी संकष्टी चतुर्थी का व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व, तृतीया तिथि के दिन पड़ जाता है।

क्योंकि चन्द्र उदय का समय सभी शहरों के लिए अलग-अलग होता है इसीलिए संकष्टी चतुर्थी के व्रत की तालिका का निर्माण शहर की भूगोलिक स्थिति को लेकर करना अत्यधिक जरुरी है। द्रिकपञ्चाङ्ग की तालिका हरेक शहर की भूगोलिक स्थिति को लेकर तैयार की जाती है इसीलिए यह ज्यादा शुद्ध है। अधिकतर पञ्चाङ्ग सभी शहरों के लिए एक ही तालिका को सूचीबद्ध करते हैं इसीलिए वो केवल एक ही शहर के लिए मान्य होते हैं।
10.240.0.11
Google+ Badge
 
facebook button