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१९१२ मासिक कालाष्टमी व्रत के दिन उज्जैन, मध्यप्रदेश, इण्डिया के लिए

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१९१२ कालाष्टमी
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१९१२ मासिक कालाष्टमी उपवास के दिन उज्जैन, इण्डिया के लिए

मासिक कालाष्टमी १९१२

कालाष्टमी
कालाष्टमी
कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त साल की सभी कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और उनके लिए उपवास करते हैं।

सबसे मुख्य कालाष्टमी जिसे कालभैरव जयन्ती के नाम से जाना जाता है, उत्तरी भारतीय पूर्णीमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार मार्गशीर्ष के महीने में पड़ती है जबकि दक्षिणी भारतीय अमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार कार्तिक के महीने पड़ती है। हालाँकि दोनों पञ्चाङ्ग में कालभैरव जयन्ती एक ही दिन देखी जाती है। यह माना जाता है कि उसी दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे।

कालभैरव जयन्ती को भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।
kalash १९१२  kalash
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११ जनवरी (बृहस्पतिवार) कालाष्टमी
०९ फरवरी (शुक्रवार) कालाष्टमी
१० मार्च (रविवार) कालाष्टमी
०९ अप्रैल (मंगलवार) कालाष्टमी
०९ मई (बृहस्पतिवार) कालाष्टमी
०७ जून (शुक्रवार) कालाष्टमी
०७ जुलाई (रविवार) कालाष्टमी
०६ अगस्त (मंगलवार) कालाष्टमी
०४ सितम्बर (बुधवार) कालाष्टमी
०३ अक्टूबर (बृहस्पतिवार) कालाष्टमी
०२ नवम्बर (शनिवार) कालाष्टमी
०१ दिसम्बर (रविवार) कालभैरव जयन्ती
३० दिसम्बर (सोमवार) कालाष्टमी
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यह ध्यान में रखना चाहिए कि कालाष्टमी का व्रत सप्तमी तिथि के दिन भी हो सकता है। धार्मिक मूलग्रन्थ के अनुसार जिस दिन अष्टमी तिथि रात्रि के दौरान प्रबल होती है उस दिन व्रतराज कालाष्टमी का व्रत किया जाना चाहिए। इसके अनुसार ही कालाष्टमी के लिए व्रत के दिन का चयन करने के लिए द्रिक पञ्चाङ्ग सुनिश्चित करता है कि प्रदोष के बाद कम से कम एक घटी के लिए अष्टमी को प्रबल होना चाहिए। अन्यथा कालाष्टमी पिछले दिन चली जाती है जब रात्रि के दौरान अष्टमी तिथि के और अधिक प्रबल होने की सम्भावना होती है।
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