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२०२१ एकादशी व्रत के दिन उज्जैन, मध्यप्रदेश, भारत के लिए

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२०२१ एकादशी के दिन
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२०२१ एकादशी उपवास के दिन उज्जैन, भारत के लिए

२०२१ एकादशी उपवास के दिन

Goddess Ekadashi
भगवान विष्णु की योग माया - देवी एकादशी
हिन्दु कैलेण्डर में हर ११वीं तिथि को एकादशी उपवास किया जाता है। एक माह में दो एकादशी व्रत होते हैं जिसमे से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है। भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनके भक्त एकादशी व्रत रखते हैं।

एकादशी उपवास तीन दिनों तक चलता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अगले दिन पेट में भोजन का कोई अवशेष न रहे श्रद्धालु उपवास के एक दिन पहले केवल दोपहर में भोजन करते हैं। एकादशी के दिन श्रद्धालु कठोर उपवास रखते हैं और अगले दिन सूर्योदय के बाद ही उपवास समाप्त करते हैं। एकादशी उपवास के समय सभी तरह के अन्न का भोजन करना वर्जित होता है।

श्रद्धालु अपनी मनोशक्ति और शरीर की सामर्थ के अनुसार पानी के बिना, केवल पानी के साथ, केवल फलों के साथ अथवा एक समय सात्विक भोजन के साथ उपवास को करते हैं। उपवास के समय किस तरह का भोजन खाना है यह निर्णय उपवास शुरू करने से पहले लिया जाता है।
kalash २०२१  kalash
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०९ जनवरी (शनिवार) सफला एकादशी
२४ जनवरी (रविवार) पौष पुत्रदा एकादशी
०७ फरवरी (रविवार) षटतिला एकादशी
०८ फरवरी (सोमवार) वैष्णव षटतिला एकादशी
२३ फरवरी (मंगलवार) जया एकादशी
०९ मार्च (मंगलवार) विजया एकादशी
२५ मार्च (बृहस्पतिवार) आमलकी एकादशी
०७ अप्रैल (बुधवार) पापमोचिनी एकादशी
२३ अप्रैल (शुक्रवार) कामदा एकादशी
०७ मई (शुक्रवार) बरूथिनी एकादशी
२२ मई (शनिवार) मोहिनी एकादशी
२३ मई (रविवार) गौण मोहिनी एकादशी
वैष्णव मोहिनी एकादशी
०६ जून (रविवार) अपरा एकादशी
२१ जून (सोमवार) निर्जला एकादशी
०५ जुलाई (सोमवार) योगिनी एकादशी
२० जुलाई (मंगलवार) देवशयनी एकादशी
०४ अगस्त (बुधवार) कामिका एकादशी
१८ अगस्त (बुधवार) श्रावण पुत्रदा एकादशी
०३ सितम्बर (शुक्रवार) अजा एकादशी
१७ सितम्बर (शुक्रवार) परिवर्तिनी एकादशी
०२ अक्टूबर (शनिवार) इन्दिरा एकादशी
१६ अक्टूबर (शनिवार) पापांकुशा एकादशी
०१ नवम्बर (सोमवार) रमा एकादशी
१४ नवम्बर (रविवार) देवुत्थान एकादशी
१५ नवम्बर (सोमवार) वैष्णव देवुत्थान एकादशी
३० नवम्बर (मंगलवार) उत्पन्ना एकादशी
१४ दिसम्बर (मंगलवार) मोक्षदा एकादशी
३० दिसम्बर (बृहस्पतिवार) सफला एकादशी
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कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्थ-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।

भगवान विष्णु का प्यार और स्नेह के इच्छुक परम भक्तों को दोनों दिन एकादशी व्रत करने की सलाह दी जाती है।

इस पृष्ठ के सभी एकादशी व्रतों के दिन स्मार्थों के लिए मान्य हैं। एकादशी व्रतों के दिन जो वैष्णव सम्प्रदाय के लिए मान्य है वैष्णव एकादशी उपवास पर सूचित किये गए हैं। साधारणतः वैष्णव एकादशी और स्मार्थ एकादशी का व्रत एक ही दिन होता है परन्तु साल में तीन-चार बार वैष्णव एकादशी का व्रत स्मार्थ एकादशी के एक दिन बाद होता है।
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