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१९०९ दीवाली के लिए लक्ष्मी पूजा का समय उज्जैन, मध्यप्रदेश, भारत के लिए

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Title
१९०९ लक्ष्मी पूजा
वर्ष:
ग्लोब
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१९०९ लक्ष्मी पूजा, दीवाली पूजा का समय उज्जैन, भारत के लिए
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लक्ष्मी पूजा

१२वाँ
नवम्बर १९०९
(शुक्रवार)
लक्ष्मी-गणेश पूजा के पश्चात परिवार उत्सव मनाते हुए
लक्ष्मी-गणेश पूजा के पश्चात परिवार उत्सव मनाते हुए

प्रदोष काल मुहूर्त


लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = १७:५० से १९:४७
अवधि = १ घण्टा ५७ मिनट्स
प्रदोष काल = १७:४० से २०:१६
वृषभ काल = १७:५० से १९:४७
अमावस्या तिथि प्रारम्भ = १२/नवम्बर/१९०९ को ०५:३६ बजे
अमावस्या तिथि समाप्त = १३/नवम्बर/१९०९ को ०७:४८ बजे
टिप्पणी - २४ घण्टे की घड़ी उज्जैन के स्थानीय समय के साथ और सभी मुहूर्त के समय के लिए डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है)।

महानिशिता काल मुहूर्त


लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = २३:४५ से २४:३७
अवधि = ० घण्टे ५२ मिनट्स
महानिशिता काल = २३:४५ से २४:३७
सिंह काल = २४:१६ से २६:२८
अमावस्या तिथि प्रारम्भ = १२/नवम्बर/१९०९ को ०५:३६ बजे
अमावस्या तिथि समाप्त = १३/नवम्बर/१९०९ को ०७:४८ बजे
टिप्पणी - २४ घण्टे की घड़ी उज्जैन के स्थानीय समय के साथ और सभी मुहूर्त के समय के लिए डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है)।

चौघड़िया पूजा मुहूर्त


दीवाली लक्ष्मी पूजा के लिये शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातःकाल मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) = ०६:४२ - १०:४९
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) = १२:११ - १३:३३
अपराह्न मुहूर्त (चर) = १६:१८ - १७:४०
रात्रि मुहूर्त (लाभ) = २०:५६ - २२:३३
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) = २४:११+ - २९:०५+


टिप्पणी - २४ घण्टे की घड़ी उज्जैन के स्थानीय समय के साथ और सभी मुहूर्त के समय के लिए डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है)।
१९०९ लक्ष्मी पूजा, दिवाली पूजा

लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग २ घण्टे २४ मिनट तक रहता है। कुछ स्त्रोत लक्ष्मी पूजा को करने के लिए महानिशिता काल भी बताते हैं। हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों, जो इस विशेष समय के दौरान लक्ष्मी पूजा के बारे में अधिक जानते हैं, उनके लिए यह समय ज्यादा उपयुक्त होता है। सामान्य लोगों के लिए हम प्रदोष काल मुहूर्त उपयुक्त बताते हैं।

लक्ष्मी पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं। लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है। ऐसा माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है। इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है। वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है।

लक्ष्मी पूजा के लिए हम यथार्थ समय उपलब्ध कराते हैं। हमारे दर्शाये गए मुहूर्त के समय में अमावस्या, प्रदोष काल और स्थिर लग्न सम्मिलित होते हैं। हम स्थान के अनुसार मुहूर्त उपलब्ध कराते हैं इसीलिए आपको लक्ष्मी पूजा का शुभ समय देखने से पहले अपने शहर का चयन कर लेना चाहिए।

अनेक समुदाय विशेष रूप से गुजराती व्यापारी लोग दीवाली पूजा के दौरान चोपड़ा पूजन करते हैं। चोपड़ा पूजा के दौरान देवी लक्ष्मीजी की उपस्थिति में नई खाता पुस्तकों का शुभारम्भ किया जाता है और अगले वित्तीय वर्ष के लिए उनसे आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है। दीवाली पूजा को दीपावली पूजा और लक्ष्मी गणेश पूजन के नाम से भी जाना जाता है।

द्रिक पञ्चाङ्ग के सभी सदस्यों की ओर से आपको दीवाली १९०९ की हार्दिक शुभकामनायें।
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