deepak

२०२२ बरूथिनी एकादशी व्रत का दिन उज्जैन, मध्यप्रदेश, इण्डिया के लिए

deepak
Useful Tips on
Panchang
Switch to English
Empty
Title
२०२२ बरूथिनी एकादशी
वर्ष:
ग्लोब
अपना शहर खोजें:
२०२२ बरूथिनी एकादशी उपवास का दिन उज्जैन, इण्डिया के लिए

बरूथिनी एकादशी व्रत

२६वाँ
अप्रैल २०२२
(मंगलवार)
बरूथिनी एकादशी
बरूथिनी एकादशी

बरूथिनी एकादशी पारण


२७th को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय = ०६:४१ से ०८:३४
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय = ०६:४१
एकादशी तिथि प्रारम्भ = २६/अप्रैल/२०२२ को ०१:३७ बजे
एकादशी तिथि समाप्त = २७/अप्रैल/२०२२ को ००:४७ बजे
टिप्पणी - २४ घण्टे की घड़ी उज्जैन के स्थानीय समय के साथ और सभी मुहूर्त के समय के लिए डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है)।
२०२२ बरूथिनी एकादशी

समय - उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख माह में कृष्ण पक्ष के दौरान और दक्षिण भारतीय अमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार चैत्र माह में कृष्ण पक्ष के दौरान बरूथिनी एकादशी पड़ती है। पूर्णिमांत पञ्चाङ्ग और अमांत पञ्चाङ्ग का यह भेद नाम-मात्र का है और दोनों पञ्चाङ्गों में बरूथिनी एकादशी का व्रत एक ही दिन पड़ता है। अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार वर्तमान में यह मार्च या अप्रैल के महीने में आती है।

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है।

एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।.

भगवान विष्णु का प्यार और स्नेह के इच्छुक परम भक्तों को दोनों दिन एकादशी व्रत करने की सलाह दी जाती है।
« विगत कामदा एकादशी आगामी मोहिनी एकादशी »
10.160.15.212
facebook button