deepak

१९१३ पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का दिन उज्जैन, मध्यप्रदेश, भारत के लिए

deepak
Useful Tips on
Panchang
Switch to English
Empty
Title
१९१३ पौष पुत्रदा एकादशी
वर्ष:
ग्लोब
अपना शहर खोजें:
१९१३ पौष पुत्रदा एकादशी उपवास का दिन उज्जैन, भारत के लिए

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत

१८वाँ
जनवरी १९१३
(शनिवार)
पौष पुत्रदा एकादशी
पौष पुत्रदा एकादशी

पौष पुत्रदा एकादशी पारण


१९th को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय = १३:४२ से १५:५२
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय = १४:२३

दूजी पौष पुत्रदा एकादशी = - १९th, जनवरी को
२०th को, दूजी एकादशी के लिए पारण (व्रत तोड़ने का) समय = ०७:१४ से ०९:२४
पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी
एकादशी तिथि प्रारम्भ = १८/जनवरी/१९१३ को १०:११ बजे
एकादशी तिथि समाप्त = १९/जनवरी/१९१३ को ०८:५४ बजे
टिप्पणी - २४ घण्टे की घड़ी उज्जैन के स्थानीय समय के साथ और सभी मुहूर्त के समय के लिए डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है)।
१९१३ पौष पुत्रदा एकादशी

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है।

एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।.

भगवान विष्णु का प्यार और स्नेह के इच्छुक परम भक्तों को दोनों दिन एकादशी व्रत करने की सलाह दी जाती है।
« विगत सफला एकादशी आगामी षटतिला एकादशी »
10.160.15.204
facebook button